Saturday, March 26, 2011

बाल गीत: हाथी आया


यह गीत नन्हे मुन्नों को विश्लेषण शब्दों का ज्ञान देने के लिए समर्पित

हाथी आया


हाथी आया, हाथी आया देखो बच्चों हाथी आया!

इसके लम्बे कान तो देखो, इसकी छोटी पूँछ तो देखो !!

लम्बी पूँछ हिलाता आया, हाथी आया हाथी आया !!

मोटे मोटे पैर हैं इसके, बड़े बड़े से कान हैं इसके !
छोटी पूँछ हिलाता आया हाथी आया हाथी आया !!

केला इसको अच्छा लगता गन्ना इसको मीठा लगता !

मोटी तोंद हिलाता आया, हाथी आया हाथी आया !!


बड़े बड़े दो दांत हैं इसके मुंह में छोटे दांत हैं इसके !

बड़ा सा सर हिलाता आया, हाथी आया हाथी आया !!


इसकी चाल बड़ी मतवाली, इसकी सूंड बड़ी मतवाली !

झूम झूम के चलता आया, हाथी आया हाथी आया !!


- राजेश्वरी सक्सेना

बाल गीत: मैं भी शिमला घूम के आई


मैं भी शिमला घूम के आई

शिमला की मत पूछो भाई, मैं भी शिमला घूम के आई

ऊंचे ऊंचे पर्वत देखे, गहरी गहरी घाटी देखीं

झरने की कल कल मेरे मन को भाई

मैं भी शिमला घूम के आई

घनघोर घनेरे बादल देखे, ठंडी बर्फीली घाटी देखीं

बरखा की रिमझिम बूँदें मेरे मन को भाई

मैं भी शिमला घूम के आई

हरे पेड़ लहराते देखे, सुंदर फूल मुस्काते देखे

नदियों की लहराती चाल मेरे मन को भाई

मैं भी शिमला घूम के आई

धरती का सुंदर रूप रहे ऐसा ही पावन

हरा भरा कर दे धरती को, ये संकल्प मन में लेके आई

मैं भी शिमला घूम के आई


Wednesday, March 23, 2011

चीत्कार एक कन्या भ्रूण की...



चीत्कार ! एक कन्या भ्रूण की

रुको, रुको ये क्या करने जा रहे हो ?

मुझे पहचानते हो?
नहीं पहचाना?...
अरे! मैं तुम्हारा ही अंश हूँ,
तुम्हारी अजन्मी बेटी !
क्या मुझे पैदा होने से पहले ही
मुझे समाप्त कर दोगे ?
तुमने मुझे कैसे भुला दिया !

मैं ही तो हूँ, जो......

कभी तुम्हारी कलाई पर राखी बनकर,
तुम्हारी लम्बी आयु की कामना करती हूँ !

कभी तुम्हारी अर्धांगिनी बनकर,
तुम्हारे प्रतिरूप का निर्माण करती हूँ !

कभी माँ बनकर तुम्हें संसार में लाकर,
तुम्हें अपना रक्त पिलाकर तुम्हारा पोषण किया !
ताकि तुम संसार के सभी सुखों को भोग सको.
और अपने संघर्ष से पृथ्वी पर स्वर्ग का निर्माण कर सको !

भूल गए? मैंने ही तो तुम्हारे जीवन में रंग भरे, पत्नी बनकर !
में ही तो अपनी किलकारियों से तुम्हारे आँगन को भरती हूँ!

मैं ही तो सहोदरा बनकर तुम्हारे बचपन को स्नेहसिक्त करती हूँ!
क्या तुम सब कुछ भूल गए?

ज़रा सोचो तो मैं ही न रही तो...

तो मानवता को क्या होगा?
तो का मनु का सपना यहीं खत्म हो जायेगा?
मानवता की समाप्ति हो जाएगी!
मेरे बिना का अगली पीढ़ी को ला पाओगे?

इसलिए अभी रोक लो अपने कदम!
जो मुझे संसार मैं आने से पहले ही समाप्त करने को आतुर हैं!
नहीं तो सब कुछ ख़त्म हो जायेगा

मानवता ख़त्म हो जाएगी!

मानवता ख़त्म हो जाएगी!.......




- राजेश्वरी सक्सेना 'स्वराज'